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Saturday, February 4, 2012

दिल से तेरी निगाह (असदुल्लाह खान / मिर्ज़ा ग़ालिब)

दिल से  तेरी  निगाह  जिगर  तक  उतर  गयी  - 2दोनों  को  इक  अदा  में  रजामंद  कर  गयी  - 2

वो  बादा -ए-शबाना  की  सरमस्तियाँ  कहाँ
उठिए  बस  अब  के  लज्ज़त -ए -काब -ए -सहर  गयी  - 2

देखो  तो  दिल -फरेबी -ए -अंदाज़ -ए -नक्श -ए -पा - 2
मौज -ए -किराम -ए -यार  भी  क्या  गुल  क़तर  गयी  - 2

नज्जारे  ने  भी  काम  किया  वां  नकाब  का  - 2
मस्ती  से  हर  निगाह  तेरे  रुख  पर  बिखर  गयी  - 2

मारा  ज़माने  ने
मारा  ज़माने  ने  असदुल्लाह  खान  तुम्हें - 2
वो  वलवले  वो
वो  वलवले  कहाँ  वो  जवानी  किधर  गयी  - 2

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