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Wednesday, August 21, 2013

शहर में नया मॉल आया है, गाड़ी निकालो! (भाग - I)

(भाग - I)

पश्चिमी दिल्ली का नया चमचमाता मॉल, हाजिरी भरने वालों की धक्कमपेल और सामने वाली सड़क पर ट्रैफिक जाम। EMI के बोझ से लद्दी गाड़ियाँ मेन गेट पे रूकती, चुलबुले, मोटे ताज़े बच्चे उच्चक कर बाहर निकलते और पीछे-पीछे अभिभावक। आहूजा फैमली की नयी हुंडई वेरना SX भी अभी खाली हुई है।  हरीश आहूजा, बी टेक सेकंड इयर, को कार के दरवाज़ों की 'ढप्प' वाली आवाज़ कूल लगती है इसीलिए खामखा अपनी साइड वाला दरवाज़ा दो बार बंद करता है। बड़े मम्मी (भूतपूर्व 'दादी'), जो की भारतीय स्वाभिमान की तरह धीरे-धीरे, दुखी मन से लगभग एक युगांत पश्चात बाहर निकलने में सफल हुई हैं, की साइड वाले दरवाज़े को ढप्प से बंद करने की जिम्मा भी हरीश ने हथिया लिया है। हरीश का इरादा अमरीका जाने का है।  हॉलीवुड फिल्मों में ढप्प की आवाज़ कुछ और ही होती है।



परिवार के मुखिया, करमबीर आहूजा, पेशे से ठेकेदार, ड्राईवर को देने की लिए पैसे गिन रहे हैं। तीस की पार्किंग और बीस का चाय-समोसा, कुल पचास। उनके पास मिनिमम सौ का नोट है, साला बाकी पैसे वापिस नहीं करेगा, इसीलिए हरीश से पचास मांग कर ड्राईवर को देते हैं, हालाँकि उन्हें पता है की इस इमरजेंसी असिस्टेंस के बदले, IMF की तरह, हरीश पांच सौ से कम में नहीं मानेगा। गाड़ी पार्किंग की ओर और मंजिल सामने। बाल कलाकार गोलू और खुशबू पहले ही सिक्यूरिटी चेक के पार लग चुके हैं। हरीश और सिल्की आगे-आगे चलते हैं अपने-अपने स्मार्ट फ़ोन और बालों को सहलाते हुए। उनके दोस्तों को WhatsApp पर सन्देश भेजे जा चुके हैं। मिस्सेस आहूजा, सॉरी, तन्वी आहूजा अपने पति करमबीर आहूजा से थोड़ा हट कर चल रही हैं। कितनी बार कहा है की जीन्स और टी-शर्ट पहन लो और हेयर डाई कर लो। तन्वी जी तो कल तीन घंटे की शिफ्ट लगा आई हैं पड़ोस के पारलर में, हेयर कलर, फ़ेशिअल और वैक्सिंग।

बड़े मम्मी, यानि कमला आहूजा, शरीर से भारी और घुटनों से कमज़ोर हैं। भारतीय अर्थ व्यवस्था की तरह हिचकोले लेकर चलती हैं। देखने वाला भी हैरान। कभी लगता है की दायीं तरफ लुढ्केंगी तो कभी बायीं ओर, लेकिन नहीं, विकास हो रहा है। धीरे-धीरे बड़े मम्मी माल की और अग्रसर हैं। बड़ा मना किया की मुझे घर पर ही छोड़ जाओ लेकिन तन्वी ने पिछली किट्टी में डींग हांक दी की हम तो बड़ों की बहुत रिस्पेक्ट करते हैं और जहाँ भी जाते हैं बड़े-बूढों को साथ लेकर जाते हैं। घुटनों का दर्द से कहीं ज्यादा "बालिका वधु" का विछोह। खैर, डेरा जमा लेंगी कहीं पर और सिल्की वहीँ पर आइसक्रीम वगेरह ले आयेगी। पिछले बार गुडगाँव के माल में थक कर गलती से एस्केलेटर पर ही बैठ गयी थीं। माता की कृपा से दुर्घटना टली।

आहूजा खेमे में मंत्रणा हो रही है। सब अपने-अपने कम्फर्ट ज़ोन के हिसाब से स्ट्रेटेजी बना रहे हैं। हरीश गेमिंग ज़ोन में जा पसरेगा, सिल्की वेरो मोडा में, बड़े मम्मी लिफ्ट के पास वाले सोफ़े पर और बाकी बिग बाज़ार में। हरीश टोकता है, "'बिग बी' पोप्स, नॉट 'बिग बाज़ार'!" हरीश और सिल्की, पोप्स से पैसे ऐंठ कर, ज़ल्दी से बाय कहके खिसक जाते हैं। करमबीर बड़े मम्मी को पेप्सी ला कर देते हैं और तन्वी, गोलू और खुशबू के साथ बिग बी की और बढ़ते हैं।

*क्रमश*        






                               

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